चल मन चले हम उस दुनिया ,
जहा न हो कोई गरीब न हो कोई अमीर ,
और न हो कोई शोषण
चल मन चले हम उस दुनिया ,
जहां न हो कोई नर-नारी ,
हो तो बस इन्सान हो
चल मन चले उस दुनिया ,
जहा ख़ुशी हो साथ और दर्द का भी हो एहसास ,
इस एहसास कि हो जहां कदर ,
हो कोई प्यारा हमसफर
चल मन चले हम उस दुनिया ,
जहां विकास और हरियाली हाथो में हाथ डाले चले ,
जहां प्रकृती क्षण -क्षण में निवास करे ,
चल मन चले हम उस दुनिया ,
जहां जीने का मजा भी आये ,
और मरने का गम भी न हो .................................
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